हाँफता हूँ प्रभु तेरे दरस को, जैसे प्यासी हिरणी रे
तड़पत है मन मोरा ऐसे, जैसे जल बिन मछली रे (2)
पद 1
नयन मोरे बरसात करें नित सुन लोगों के ताने रे (2)
कहते रहे जल-जल के मुझसे (2) कहाँ तेरा परमेश्वर रे
तेरे दरस की झलक को पाने घूमूं जैसे तकली रे
तड़पत है मन मोरा
पद 2
याद करूं जब बीते पल को मन मेरा भर आता है
दृश्य तेरी महिमा गाने का (2) नयनों में छा जाता है
तेरी आश में बैठा गाऊँ मन की बाजे डपली रे
तड़पत है मन मोरा
पद 3
मन को स्वयं ही समझाता हूँ, क्यों तू निराश और व्याकुल रे (2)
आस लगाये रहना प्रभु की (2) मत हो इतना आतुर रे
दिन में दिखाएंगे प्रभु करुणा, रात्रि को गीत मैं गाऊँगा
अपने जीवन भर हे स्वामी (2) तुमसे दूर न जाऊँगा
तड़पत है मन मोरा
"जब यह पंक्ति आती है — “प्यासी हिरणी” — तो भजन संहिता 42:1 याद आता है। जैसे हिरणी जल की धाराओं के लिये हाँफती है, वैसे ही हे परमेश्वर, मेरा प्राण तेरे लिये हाँफता है।"
"जब गीत कहता है — “कहाँ तेरा परमेश्वर” — तो भजन संहिता 42:3 याद आता है। लोग प्रतिदिन मुझसे कहते हैं, तेरा परमेश्वर कहाँ है।"
"और जब कहा जाता है — “आस लगाये रहना” — तो भजन संहिता 27:14 दिल में आता है। यहोवा की बाट जोह।"
"यह गीत दरस की तड़प का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे हिरणी पास आ गई हो।"
"ताने, याद, और करुणा — यही इस गीत की गहराई है।"
"दरस के बिना तड़प है।"
"तानों के बीच भी आश रखो।"
"सीख सीधी है — जीवन भर दूर मत जाओ।"
"इस भजन के शब्द तड़प को इतनी गहरी हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही हाँफ उठती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को दरस की झलक और करुणा की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that expresses the soul's thirst for God. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो