हे सारी पृथ्वी के लोगों, यहोवा की स्तुति तुम करो
आनन्द करते सम्मुख आओ, जय जयकार सदा करो
पद 1
काम सामर्थी उसने किए हैं, पापी बचाने हुआ बलिदान (2)
शत्रु के राज्य को तोड़ दिया है (2) उसको तुम सब याद करो
उसकी स्तुति तुम करो
पद 2
स्मरण करो इज्राएली जो तुम हो, छुड़ाया तुमको मिश्र से उसने (2)
चालीस वर्ष तक तुमको चलाया (2) ताकि कनान में प्रवेश करो
उसकी स्तुति तुम करो
पद 3
मूसा को दिया सेवा में उनकी, यहोशू सदा जयवन्त हुआ (2)
शत्रु पर जयवंत राज्य जीते वह (2) महान काम को याद करो
उसकी स्तुति तुम करो
पद 4
तुम जो प्रभु की निज प्रजा हो, लोहू से उसने खरीदा तुम्हें (2)
आत्मा बचाया मण्डली बनाया (2) उसकी योजना याद करो
उसकी स्तुति तुम करो
पद 5
प्रभु बुलाता अपनी सेवा में, आज आवाज तुम उसकी सुनो (2)
अर्पण कर दो अपने को तुम (2) दण्डवत् उसको सब करो
उसकी स्तुति तुम करो
"जब यह पंक्ति आती है — “यहोवा की स्तुति तुम करो” — तो भजन संहिता 100:1 याद आता है। हे सारी पृथ्वी के लोगों, यहोवा के लिये जयजयकार करो।"
"जब गीत कहता है — “मिश्र से उसने” — तो निर्गमन 20:2 याद आता है। मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूँ, जो तुझे दासत्व के घर मिस्त्र देश से निकाल लाया।"
"और जब कहा जाता है — “लोहू से उसने खरीदा” — तो प्रेरितों के काम 20:28 दिल में आता है। उसने अपने ही लहू से उसे मोल लिया है।"
"यह गीत सारी पृथ्वी को यहोवा की स्तुति की पुकार है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे जयकार पास आ गई हो।"
"बलिदान, मिश्र, और मण्डली — यही इस गीत की गहराई है।"
"सामर्थी काम याद रखो।"
"लोहू से खरीदी प्रजा हो।"
"सीख सीधी है — आवाज सुनो, दण्डवत् करो।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने स्तुति की पुकार को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो