जीवन से भी उत्तम तेरे करूँगा (2)
होठों से स्तुति करूँगा सर्वदा
पद 1
तेरे नाम से मैं हाथ उठाऊँगा (2)
जीवन से
पद 2
होठों से स्तुति करूँगा सर्वदा
तेरे नाम से मैं हाथ उठाऊँगा (2)
जीवन से
"जब यह पंक्ति आती है — “उत्तम” — तो फिलिप्पियों 1:21 याद आता है। मेरे लिये जीवित रहना मसीह है।"
"जब गीत कहता है — “हाथ उठाऊँगा” — तो भजन संहिता 63:4 याद आता है। मैं अपने हाथ उठाकर तेरे नाम की स्तुति करूँगा।"
"और जब कहा जाता है — “स्तुति” — तो भजन संहिता 34:1 दिल में आता है। मैं हर समय यहोवा की स्तुति करूँगा।"
"यह गीत जीवन से उत्तम और स्तुति करने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे हाथ पास आ गया हो।"
"नाम, होठ, और सर्वदा — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब जीवन से उत्तम करो तो हाथ उठाओ।"
"होठों से स्तुति करो सर्वदा।"
"सीख यह है कि नाम से हाथ उठाओ।"
"इस भजन के शब्द उत्तम को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही हाथ उठाने की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को स्तुति और नाम की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that lifts hands higher than life. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो