जिंदा खुदा तेरे नाम में, पाई है मैंने शिफा (2)
तूने मुझे है सब कुछ दिया, क्यों न करूँ शुक्रिया
पद 1
गम के अंधेरों में रहता था मैं
लाखों सितम रोज सहता था मैं (2)
जीना नहीं चाहता था खुदा, तूने दिया हौसला (2)
जिंदा खुदा
पद 2
दुनिया से कुछ भी न हासिल हुआ
मेरी सुनी न किसी ने दुआ (2)
भटका बहुत दर बदर मैं खुदा, तूने दिया रास्ता
जिंदा खुदा
"जब यह पंक्ति आती है — “शिफा” — तो यशायाह 53:5 याद आता है। उसके कोड़े खाने से हम चंगे हुए।"
"जब गीत कहता है — “शुक्रिया” — तो भजन संहिता 100:4 याद आता है। उसके फाटकों में धन्यवाद के साथ प्रवेश करो।"
"और जब कहा जाता है — “हौसला” — तो यशायाह 41:10 दिल में आता है। मैं तेरे संग हूँ।"
"यह गीत नाम में शिफा पाने और शुक्रिया का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे जिंदा पास आ गया हो।"
"अंधेरे, हासिल, और रास्ता — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब नाम में शिफा पाई तो शुक्रिया करूँ।"
"अंधेरों में रहता था तो हौसला दिया।"
"कुछ न हासिल हुआ तो रास्ता दिया।"
"सीख यह है कि जिंदा खुदा।"
"इस भजन के शब्द जिंदा को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही शिफा की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को हौसला और रास्ते की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song of healing in the living God's name. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो