मेरी नैय्या लगा दो पार पापों को हरने वाले
पापों को हरने वाले, दुःख दर्द मिटाने वाले (2)
पद 1
तुम स्वर्ग छोड़कर आए, और मुक्ति पदारथ लाए (2)
कि पापी लिए बचाए
पापों
पद 2
अन्धों को आँखें दीन्हां, रोगिन को चंगा कीना
कि मुर्दे दिये जिलाए
पापों
पद 3
पानी पर चल दिखलाया, तूने हवा को डांट थमाया (2)
कि चेले लिए बचाए
पापों
पद 4
सूली पर बरछी खाई, तूने अमृतधार बहाई
कि दास सदा गुण गाए
पापों
पद 5
मेरे पाप क्षमा सब कीन्हां, मेरे दिल में दर्शन दीन्हां (2)
कि प्रभु से दिया मिलाए
पापों
"जब यह पंक्ति आती है — “नैय्या लगा दो पार” — तो मरकुस 4:39 याद आता है। उसने आँधी को डांटा, और कहा, चुप रह, शान्त हो।"
"जब गीत कहता है — “अन्धों को आँखें” — तो मत्ती 11:5 याद आता है। अन्धे देखते हैं, लंगड़े चलते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं।"
"और जब कहा जाता है — “अमृतधार बहाई” — तो यूहन्ना 19:34 दिल में आता है। उसके पंजर में बरछा भोंका, और तुरन्त लोहू और पानी निकला।"
"यह गीत पार लगाने वाले की पुकार है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे पार पास आ गया हो।"
"आँखें, हवा, और अमृतधार — यही इस गीत की गहराई है।"
"वह पाप हरता और दुःख मिटाता है।"
"सूली पर बरछी खाई।"
"सीख सीधी है — क्षमा और दर्शन उसी से मिलते हैं।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने पार लगाने को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो