पनघट पर यीशु जा बैठा, एक औरत आई सामरिया
जल भरने को औरत आई थी, सर कमर रखे थी गागरिया
पद 1
जब लगी प्यास थी यीशु को, तब पानी माँगे नासरिया
पनघट पर...
पद 2
तुम उत्तम जाति यहूदी हो, मैं नीच जाति हूँ सामरिया
पनघट पर...
पद 3
जब जान लिया ये यीशु है, झट छोड़ चली वो गागरिया
पनघट पर...
पद 4
चलो चलो मसीह जी के दर्शन को, मैं तुम को देती खबरिया
पनघट पर...
"जब यह पंक्ति आती है — “पनघट पर यीशु जा बैठा” — तो मन ठहर-सा जाता है। यह बात यूहन्ना 4:6 की याद दिलाती है।"
"जब गीत कहता है — “मैं नीच जाति हूँ सामरिया” — तो यूहन्ना 4:9 याद आता है।"
"और जब कहा जाता है — “मैं तुम को देती खबरिया” — तो यूहन्ना 4:29 दिल में आता है।"
"प्यासा प्रभु, प्यासी औरत के पास बैठा।"
"यह केवल पुराने समय की बात नहीं रह जाती, बल्कि हमारी अपनी कहानी बन जाती है। किसी घर में एक माँ इसे धीरे गाती है, कोई जवान अपनी राह में इसे सुनता है, और कभी पूरी कलीसिया एक साथ गाती है।"
"उस पल लगता है जैसे अलग-अलग आवाज़ें नहीं, एक ही दिल परमेश्वर को पुकार रहा हो। यही इस गीत की खूबसूरती है।"
"गागर छोड़ो, और जो मिला है उसे बताओ।"
"यह गीत हमें बोझ देने के लिए नहीं, यह याद दिलाने के लिए है कि हम अकेले नहीं हैं।"
"सीख सीधी है। अपना भरोसा केवल अपने ऊपर न रखें।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने इस बात को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में आँखें अपने आप झुक जाती हैं और दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो