प्रभु मेरे मन मंदिर से, कभी दूर न जाना तुम (2)
तुम बिन मर जाऊँगा, मुझे प्यार लगाना तुम
पद 1
इस माटी के बर्तन को तुमने सवाँरा है
सबने छोड़ा लेकिन तुमने दिया सहारा है
इस माटी के बर्तन को कभी छोड़ न जाना तुम
पद 2
इतनी बड़ी दुनिया छोड़ी मेरे दिल में बसे हो तुम (2)
ऊँचा-नीच न करते कितने अच्छे हो तुम
तुम तो बसे हो रग-रग में मुझे पार लगाना तुम
पद 3
तुम हो ज्योतिर्मय सनातन, सदा से परमेश्वर
करते हो रक्षा दिखाते कृपा भक्तों पर
मुझ पापी से प्रीत हमेशा प्रभु निभाना तुम
मुझ पापी से प्रीति निभाना तुम
"जब यह पंक्ति आती है — “मन मंदिर” — तो 1 कुरिन्थियों 6:19 याद आता है। क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मन्दिर है।"
"जब गीत कहता है — “माटी के बर्तन” — तो 2 कुरिन्थियों 4:7 याद आता है। हमारे पास यह खजाना मिट्टी के बरतनों में है।"
"और जब कहा जाता है — “रग-रग” — तो भजन संहिता 139:13 दिल में आता है। तूने मेरे अन्दर के अंगों को रचा।"
"यह गीत मन मंदिर से दूर न जाने और प्यार लगाने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे मंदिर पास आ गया हो।"
"बर्तन, रग, और प्रीत — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब मन मंदिर हो तो दूर मत जाना।"
"माटी के बर्तन को सवाँरा और सहारा दिया।"
"दुनिया छोड़ी और रग-रग में बसे।"
"ज्योतिर्मय हो और प्रीत निभाओ।"
"सीख यह है कि प्यार लगाना।"
"इस भजन के शब्द मंदिर को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही दूर न जाने की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को बर्तन और प्रीत की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that keeps Him in the heart's temple. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो