प्रभु तेरे चरणों में, अरदास हमारी है
क्या भेंट करूँ तुमको, हर वस्तु तुम्हारी है
पद 1
हम तेरे ही गुण गायें, प्रभु तेरे ही मन भायें
तू याद रहे हरदम, तेरी संगति में आयें
हर समय करूँ सुमिरन (2) हर स्वॉस तुम्हारी है
क्या
पद 2
तन, मन, धन के दाता, तेरी विनती सदा करूँ
तेरे वचनों को सुनकर, तेरा ही ध्यान धरूँ
अभिमान न करूँ, ये अरज हमारी है
क्या
पद 3
विश्वास तुम्हारा हो, प्रभु जी इस तन मन में
सबको भरपूर करो, दो खैर ये दामन में
प्रभु जी तेरा हर प्रेमी, चरणों का पुजारी है
क्या
पद 4
इस पापी मनवा से, प्रभु जो भी भजन करूँ
उद्धार प्रभु दे दो, मैं शत्-शत् नमन करूँ
हृदय की भेंट करूँ, फिर मरजी तुम्हारी है
क्या
"जब यह पंक्ति आती है — “चरणों में” — तो भजन संहिता 132:7 याद आता है। आओ, हम उसके निवास में प्रवेश करें।"
"जब गीत कहता है — “भेंट” — तो भजन संहिता 96:8 याद आता है। यहोवा के नाम की महिमा करो, भेंट लेकर उसके आँगनों में आओ।"
"और जब कहा जाता है — “सुमिरन” — तो भजन संहिता 34:1 दिल में आता है। मैं हर समय यहोवा की स्तुति करूँगा।"
"यह गीत चरणों में अरदास और भेंट की बात का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे भेंट पास आ गई हो।"
"गुण, दाता, और नमन — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब चरणों में अरदास करो तो हर वस्तु तुम्हारी है।"
"गुण गाओ और सुमिरन करो।"
"तन मन धन के दाता हो।"
"विश्वास हो और पुजारी बनो।"
"सीख यह है कि हृदय की भेंट करो।"
"इस भजन के शब्द चरणों को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही अरदास की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को भेंट और नमन की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song of offering at His feet. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो