सारी सृष्टि के मालिक तुम्हीं हो, सारी सृष्टि के रक्षक तुम्हीं हो
करते हैं तुझ को सादर प्रणाम, गाते हैं तेरे ही गुणगान
हा-हा-हा-हालेलूयाह (3) आमीन
पद 1
सारी सृष्टि को तेरा सहारा, सारे संकट से हमको बचाना
तेरे हाथों में जीवन हमारा है, अपनी राह पर हमको चलाना
हा-हा-हा-हालेलूयाह (3) आमीन
पद 2
हम हैं तेरे हाथों की रचना, हम पर रहे तेरी करुणा
तन, मन, धन हमारा तेरा है, इन्हें शैतान को छूने न देना
हा-हा-हा-हालेलूयाह (3) आमीन
पद 3
अब दूर नहीं है किनारा, धीरज को हमारे बढ़ाना
जीवन की हमारी इस नैया को, भव सागर में खोने न देना
हा-हा-हा-हालेलूयाह (3) आमीन
"जब यह पंक्ति आती है — “सारी सृष्टि के मालिक” — तो भजन संहिता 24:1 याद आता है। पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा का है।"
"जब गीत कहता है — “हाथों की रचना” — तो भजन संहिता 139:14 याद आता है। मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूँ।"
"और जब कहा जाता है — “नैया को खोने न देना” — तो मरकुस 4:39 दिल में आता है। उसने आँधी को डांटा, और कहा, चुप रह, शान्त हो।"
"यह गीत सृष्टि के मालिक और रक्षक का गुणगान है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे हालेलूयाह पास आ गई हो।"
"सहारा, करुणा, और किनारा — यही इस गीत की गहराई है।"
"जीवन उसके हाथों में है।"
"तन मन धन उसका है।"
"सीख सीधी है — नैया को भव सागर में खोने न दो।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने मालिक के गुणगान को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो