शान्ति का राजा आ रहा है, होवे जय जयकार (2)
राजाओं के राजा यीशु मसीह की, होवे जय जयकार (2)
पद 1
बालक उसका स्वागत करते, राह में अपने कपड़े बिछाते
इतना गहरा प्यार दिखाते, मानो अपने दिल हैं बिछाते
ऊँचे स्वर से दिल से कहते, होवे जय जयकार (2)
पद 2
होशन्ना के नारे उनके, सारे आकाश में गूँज रहे हैं
श्रद्धा, भक्ति और खुशी से दिल भी उनके झूम रहे हैं
पराक्रमी प्रभु यीशु मसीह की, होवे जय जयकार (2)
पद 3
सुनने वालों आज दिलों को, सामने उसके अर्पण कर दो
खाली दिलों को अर्पण करके, उसकी महिमा का दर्शन कर लो
साथ हमारे आवाज मिलाओ, होवे जय जयकार (2)
"जब यह पंक्ति आती है — “शान्ति का राजा” — तो यशायाह 9:6 याद आता है। उसकी अध्यक्षता बढ़ती रहेगी, और उसकी शान्ति का अन्त न होगा।"
"जब गीत कहता है — “कपड़े बिछाते” — तो मत्ती 21:8 याद आता है। भीड़ में से बहुतेरों ने अपने कपड़े मार्ग में बिछा दिए।"
"और जब कहा जाता है — “होशन्ना” — तो मत्ती 21:9 दिल में आता है। होशन्ना, दाऊद की सन्तान! धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है।"
"यह गीत शान्ति के राजा के स्वागत का है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे जयकार पास आ गई हो।"
"कपड़े, होशन्ना, और अर्पण — यही इस गीत की गहराई है।"
"राजा आ रहा है।"
"दिल बिछाकर स्वागत करो।"
"सीख सीधी है — आवाज मिलाओ, जयकार करो।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने जयकार को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो